भाषा / Language
जब तुम्हें पहली बार देखा और चुना तो मेरे पास कोई योजना...…
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जब तुम्हें पहली बार देखा और चुना तो मेरे पास कोई योजना.....कोई चाहना नहीं थी।
बस ईश्वर का इशारा था ...मन था।
इतने बरसों में आज जब तुमको देखती हूँ तो लगता है मेरे पास आज भी कुछ नहीं....
पर ढ़ेर सारा ईश्वर
अनंत चाहनायें और एक उद्देश्य है.... बेहद प्रेमिल रहने का मन
मैं वहीं हूँ.... तुम भी शायद वही हो ।
पर साल दर साल अब प्रेम से भर गई हूं। ये लौटने वाले कदम तो नहीं मेरे। मुझे सुकून है खुद में।
I never planned you.
You are my planned purpose.
A journey .....To self
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें