भाषा / Language
उस तितली को फूल पर बैठा देख पूछा....इतनी सहज इतनी शांत कैसे हो
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उस तितली को फूल पर बैठा देख पूछा....इतनी सहज इतनी शांत कैसे हो ?
फूल कितना प्रेम करता होगा तुमको
तितली ने कहा तू भी किसी रोज़ उड़ कर देख ...
लौट...
लौट कर अपने फूल को देख
लौटना प्रेम से भी बड़ा प्रेम है ।
फूल प्रेम करता नहीं मुझसे....
मैं करती हूं।
वो मेरा शुक्रिया अदा करता है।
मेरी लौटने की जिद्द पर मुबारकबाद देता है।
बंधन वो नहीं जो होता है ....
बंधा हुआ दिखाए नहीं
बांधने वाला बताए नहीं
कौन किसके प्रेम में ?
पता नहीं
बस बिंधे रहें...
दो अलभ्य
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें