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In conversation with पिताजी

In conversation with पिताजी... आज पिताजी का मन था भैरव मंदिर जाकर पाठ करने का। बयानब्बे वर्ष में भी उनकी इच्छाशक्ति देखते ही बनती है। अभी भी उनकी स्मृति शानदार है। उन्हें अपना बचपन और पुराने दिन जस के तस याद हैं। ईश्वर आप को स्वस्थ रखे। आज पिताजी से खूब पुरानी बातें की। उनकी बातें रिकॉर्ड कर ली। ये देख कर हैरत में पड़ गई कि छोटी छोटी बातें उन्हें अब तक सिलसिलेवार याद हैं। मंदिर जाते वक्त उन्हें राकेश जीजाजी मिल गए और आते वक्त एक सज्जन आर्मी के अफसर ने उनको देख कर अपनी बड़ी सी कार रोक दी। घर आते ही पिताजी बोले ...देखा मेरा भैरव कितना सिद्ध है यहां का। घर तक साधन भेज दिया। मेरा मन सुन लिया भगवान ने। उनकी मुस्कान देखते ही बन रही थी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें