कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3783

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मिसरा -मिसरा बिखर गयी हूँ कागज़ पर

मिसरा -मिसरा बिखर गयी हूँ कागज़ पर कोई लब तलक लाओ कि ग़ज़ल बने बेपनाह मुहब्बत वाला है मेरा सनम कोई खुदा मनाओ कि नक़ल बने अना की धूल में पड़ा है मेरा वजूद कोई आइना दिखाओ कि शक्ल बने क़तरा क़तरा इश्क जमाया हथेली पर कोई नुस्खा बताओ कि महल बने लाज़मी हैं फैसलों में फासले आना कोई जुमला बनाओ कि पहल बने
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें