कल्पनाशब्दों के बीच
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मेरे लिए बीते लोग...यानि बीता कल सबसे बड़े गुरु हैं

मेरे लिए बीते लोग...यानि बीता कल सबसे बड़े गुरु हैं .... मैं रोज़ एक नया आज उन्हीं के कारण उगा पाती हूँ। मेरी मुस्कान उनके लिए गुरु दक्षिणा है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें