भाषा / Language
लिफ़ाफ़े में दिल बांधने का
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लिफ़ाफ़े में दिल बांधने का ...
इक हुनर सा है ख़त
बेहद इन्तज़ारी को मिले जो ..
.बस सबर सा है ख़त
शुरू से अंत तक "तुम" का ...
ये सफ़र सा है ख़त
मेरे लिए तो बस यादों की...
वो लहर सा है ख़त
लम्हा लम्हा कैसे बीता यही ...
बस कहर सा है ख़त
लफ़्ज़ों की धार बहती जाए ....
ऐसी डगर सा है ख़त
हरी हो रही ख्वाइशें आज मेरी ....
क्या शज़र सा है ख़त ?
सूरज संग चांदनी डूबे .….
ऐसी इक खबर सा है ख़त
बेताबी बिन लिखे , पढ़ ले वो ...
कैसी नज़र सा है ख़त ?
टूटे- छूटे लफ़्ज़ों में भी गा जाएँ..
.लो बहर सा है ख़त
शिकायत का पुलिंदा सा भी ....
कभी बशर सा है ख़त
कोई नहीं दरमियान , मशरूफ ..
कोई शहर सा है ख़त
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें