आप कितनी भी हथेली खोल लो... सुख अपने ही हिस्से का आएगा और दुःख अपनी मर्ज़ी से। प्रेम अतरंगी है ... आए तो आए ना भी आए कभी। पर हथेली पर हक़ रहेगा।