भाषा / Language
मैं नश्तर लौटाती नहीं
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मैं नश्तर लौटाती नहीं....
अलग रख देती हूं।
हल्के में ना खुद लेती हूं... ना किसी और को मुझे लेने का हक देती हूं।
मेरी वाल पर कमेंट मिट जाते हैं। जो खटकता है वो मिटता ही मिटता है।
मेरी आदत पता है सब को।
No nonsense types...
मुझे अपनी वाल साफ सुथरी पसंद है।
सनद रहे।
मुखौटा उतार कर मिलें।
आप सब का शुक्रिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें