कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3736

भाषा / Language

तुमको हक़ दिया था दुःख देने का

तुमको हक़ दिया था दुःख देने का.... तुम्हें थोड़ा सा नरम होना ही चाहिए था। *हूक की आवाज़ नहीं होती टीस होती है। आज मुझे लगी है तुमको भी लगे जल्द
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें