हाँ जैसी हाँ न कहा करो .... ना लगता है। दुःख देखने और पोंछने का अंतर बहुत है। भाग देना पड़ता है।
रचना 372913 जून 2022भाषा / Languageहिन्दीEnglishहाँ जैसी हाँ न कहा करो✦हाँ जैसी हाँ न कहा करो .... ना लगता है। दुःख देखने और पोंछने का अंतर बहुत है। भाग देना पड़ता है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें