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आएंगे खुद तक ....पर अपने ही जैसे

आएंगे खुद तक ....पर अपने ही जैसे ........ शर्तों पर तो ज़िन्दगी आती है। इस फैलने सिकुड़ने वाले झबले में तुम कितनी चाँद लगती हो ....ज़िन्दगी। बस जरा सा मेरी तरफ झुक जाओ Perfect ! Smile please 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें