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जहाँ मन रखने का मन होता है वहां जानबूझ कर मौन रख देते हैं

जहाँ मन रखने का मन होता है वहां जानबूझ कर मौन रख देते हैं.... प्रेमी भी कम जलकुकड़े नहीं होते। प्रेम अपने दरवाज़े बंद नहीं करता ... बस दीवारें ऊँची कर देता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें