कल्पनाशब्दों के बीच
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इतना लिखने दिखने बता देने के बावजूद लोग मेरे बारे में कुछ न…

इतना लिखने दिखने बता देने के बावजूद लोग मेरे बारे में कुछ नहीं जानते। मैं कयास के "क" पर अपनी नोंक रखती हूं। मैं बस अपने लिए अजनबी नहीं हूँ.... बाक़ी सब मेरे होने की हाँ में हाँ मिलाते हैं। मेरी हाँ बस मुझमें रहती है वो किसी मन को दिख नहीं सकती। मैं एक निश्छल छल हूँ ... जैसे हर कोई होता है अगर होना चाहे तो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें