कल्पनाशब्दों के बीच
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ये अक्सर होता है हम दूसरों के जवाबों के इंतज़ार में बूढ़े होत…

ये अक्सर होता है हम दूसरों के जवाबों के इंतज़ार में बूढ़े होते जाते हैं। हमें हमेशा हूक उठती है दूसरे का मन अपने बारे में जानने की। कोई कह दे तो अच्छा लगने लगता है। हम दरअसल पुष्टि कर लेना चाहते हैं... उसकी हाँ की हाँ तुम हो... *आसक्ति और परवाह प्रेमिल होने की वजहें हैं .....प्रेम नहीं है अक्सर यही दुःख का कारण बनते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें