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वह हरा पेड़ अपना सारा शोर.... अपना सारा दुख नीचे गिरी उन टू…

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वह हरा पेड़ अपना सारा शोर.... अपना सारा दुख नीचे गिरी उन टूटी पत्तियों से ही कहता है । कुछ प्रेमिकाएं कहीं नहीं जाती । मैं भी कहीं नहीं जाऊंगी। शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें