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मैंने अपने लौटने में हमेशा तुम को रखा

मैंने अपने लौटने में हमेशा तुम को रखा जैसे रात को हमेशा मिलता है चाँद चाँद ! क्या तुम्हें मैं मिलती हूँ कभी?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें