भाषा / Language
कमी.... *क्या कम है पास... उसे मिटा कर ही कमी पूरी की जा सक…
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कमी....
*क्या कम है पास... उसे मिटा कर ही कमी पूरी की जा सकती है।
अगर मैं कहूं...
कुछ लिख दो मेरे लिए...
मैं उसे मिटा कर कल्पना होना चाहती हूं।
तुम्हारी कल्पना
अरसे से मेरे पास तुम बहुत कम हो
* मेरे हिस्से में तुम्हारे ज़ख्म आए ...
तुम्हारे हिस्से मेरा मरहम रखा रहा।
दो लोग बेवजह प्रेमी रहे।
तू मेरे हिस्से में नहीं है
लिखते रहे।
* भरे उजाले में भी तुम्हें ढूंढती हैं ये चरागी आंखें ...
तुम खोए थोड़े ही हो...
मुझे अब तक मिले ही नहीं।
* और दुखना नहीं चाहती थी ...
प्रेम निषेध के आगे टिक लगा दिया।
कमी के नाम पर मेरे पास तीन मनके कम हैं।
देखो अभी तुम्हें अपना नाम लिखा दिखाई दिया होगा।
*कल्पना की अधिकता को भी कमी कहा जा सकता है।
शुभ रात तुमको।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें