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प्रेमियों को हमेशा मिली जूठन
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प्रेमियों को हमेशा मिली जूठन...
पहला प्रेमिल संबोधन चिट्ठियों ने सुना
प्रिय...
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प्रिय ....
सांझ हो जाना रीत है
पर हर सांझ में मेरा रीत हो जाता प्रीत है।
तुमको देखती हूं तो शरारतों का घर हो जाती हूं।
तुम्हारी....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें