कल्पनाशब्दों के बीच
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मेरे हृदय के पत्ते कभी नहीं झड़ेंगे

मेरे हृदय के पत्ते कभी नहीं झड़ेंगे.... ये जानते हो तुम बवंडर हो जाना फिजूल है तुम्हारा *रखा रखा हुआ प्रेम कभी पत्थर नहीं होता। प्रतीक्षा का दूसरा नाम *कल्पना* है। * अभी स्कूल जा रही। शुभ दिन की कामना करती हूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें