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सुधा वैसे तो अभिभावक हैं ...P.Lakshmi की मां

सुधा वैसे तो अभिभावक हैं ...P.Lakshmi की मां ... पर आज से मेरी नई सहेली बन गई। कल चेन्नई की फ्लाइट है उसकी। आज आखरी बार मिलने आई ।मुझे इतना प्यार और आशीर्वाद देकर गई कि क्या कहूं। आंसू की भाषा सबसे सच्ची होती है। लिपि नहीं होती पर अंतस में छप जाती है। आंसू सांझा करने का रिश्ता भी सबसे नहीं बनता। तुमने बना लिया सुधा। तुम रहोगी मेरे दिल में। मैं याद रखूंगी तुम्हारा स्नेह। चेन्नई का एक द्वार मेरे लिए खुला मिलेगा ।इतना विश्वास मैंने तुमसे पा लिया है। बनी रहना। तुमने बहुत सच्चे संस्कार दिए हैं अपने बच्चों को। ईश्वर कृपा रहे आप सब पर। कौन करता है इतना प्यार जितना तुम मुझे दे गई। तस्वीर संजो ली है। मैंने यही पाया है जो पाया है इस जीवन में।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें