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कहीं भी रुक जाना

कहीं भी रुक जाना पर समय पर एक ही चप्पल की छाप छोड़ना। वक्त पर खड़े रहना बेकार काम है अवसाद मायूसी लाता है। दूसरी पैर की चप्पल हवा में रखना आगे की दिशा आगे ही रखना। दो चप्पल से समय की पूंछ पर पैर टिका दो तो कमबख्त अजगर हो जाता है। खा जाता है। *अतीत सुंदर हो सकता है पर आशातीत तो अगला पल ही हो सकता है। भूलना याद रखिए। और माफ कर देना उससे भी अधिक।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें