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आप से दिल का सौदा है

*आप से दिल का सौदा है... सौदे में दिल थोड़े ही है *दीवार तक जाकर लौट आती है निगाह...... तुम्हारी हर तस्वीर अधूरी ही बना पाई हूँ अब तलक *वक़्त के पैरों में साल भर पड़ी रही बिवाइयाँ न पल चले न प्रेमी *बहुत जतन करती हूँ कि खुद को साबुत रख सकूँ..... दिन भर रेशा रेशा रात में चटक जाती हूँ तुम याद के अलावा कब आओगे? *तुम मुझमें मेरी ऐसी दहलीज़ हो जो पार नहीं होती.... मैं जा नहीं पाती खुद की परिधि से भी बाहर तुममें दूर पास क्या होता है ? बस तुम में हूँ। *मेरे लिए स्थिरता ही प्रेम है। रहूँगी 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें