ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3481

भाषा / Language

बागी रंग

✦
बागी रंग... हरे रंग में छिपा होता है उदासी का नीला और बसंत का पीला भी जो प्रेमिल लाल में मिल कर कब शिथिल भूरा हो जाता है ... भान ही नहीं रहता। हम सूख जाते हैं यूं ही चलते चलते।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें