कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3479

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हम दोनों दो ध्रुव हैं।

हम दोनों दो ध्रुव हैं। हमारे बीच शहर,समय,सब्र और स्वभाव के महीन रेशे हैं। हमारा विपरीत होना नियत नहीं श्रेस्कर है। प्रेम को पृथ्वी पर विचरण करने के लिए धुरी नहीं ध्रुव चाहिए। मैं और तुम चाहिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें