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बाबुषा...तुम दिल रख लो

बाबुषा...तुम दिल रख लो मेरे एकांत की मीठी कैंडी हो तुम। बनी रहो... तुमको प्यार पहुंचे। किताब बहुत बहुत सुंदर है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें