कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3473

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कितना तो आसान है ये कहना कि तुम्हारी याद आती है।

कितना तो आसान है ये कहना कि तुम्हारी याद आती है। आप भी कहा कीजिए। जैसे मैं कह रही। कितनी ? उफ्फ ये पूछ कर उलझाया न किया करो ये आसानी। " मेरा " हटा कर प्रेम कीजिए। ईश्वर बना रहेगा दरमियां
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें