कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3449

भाषा / Language

मैंने प्रेम मोरपंख में रखा

मैंने प्रेम मोरपंख में रखा.... गुलाब में तो सभी ने रखा तुम्हारे लिए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें