भाषा / Language
तुम उदास करते हो कवि
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तुम उदास करते हो कवि !...
बेहद खूबसूरत किताब है।
हुबहू सुनो मनोरमा की तरह दिलकश और पठनीय
अजित सर
आपकी दो खूबसूरत किताबें मेरे खजाने में हैं।
शुक्रिया नरेश किताब मुझ तक भेज देने के लिए
किताब पर मन लिखा है ।
अभी कई पन्ने बाकी हैं।
पढ़ती रहूंगी। पढ़ाती रहूंगी।
आप कुछ प्यारा ,चिंतन करने लायक पढ़ना चाहते हैं तो ये किताब आपके लिए है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें