भाषा / Language
तन्हाइयों की पनाह में
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तन्हाइयों की पनाह में .........
सिर्फ तुम्हारी साख़ है
*काश प्रेमी खिड़कियों का शिगाफ तुम्हारे शहर का दर हो जाये ....
भेजूँ क्या उदास आवाजें?
प्रेम.....
तुम्हें जान देना......
ज़रा ज़रा रोज़
इश्क़....
तुम्हें जाने देना.....
ज़रा ज़रा रोज़
एक सा है ......पर है नहीं 😊😊😊😊
शुभरात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें