भाषा / Language
लड़का समुंदर की तरफ़ देखता रहता ।
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लड़का समुंदर की तरफ़ देखता रहता ।
लड़की की आवाज लहरों में रोज गुम हो जाती । लड़का मुड़ कर कभी न देखता।
एक रोज लड़की ने आगे बढ़कर लड़के की पीठ पर हाथ रख दिया और कहा सुनो!
लड़के ने लड़की को बिना देखे कहा
क्यों रोज आवाज़ देती हो ? तुम्हारी परेशानी क्या है ? क्यों मेरे दुःख बढ़ाती हो ? न आया करो।
लड़की ने सामने बहता समंदर आंखों में भर लिया। दो बूंद ढुलका कर कहा
ये समंदर तुम्हारी आंखों में भरा रहे।
और तुम प्यास भूल जाओ ।
तुम्हारा मन कम के लिए तरसे। तुम्हें मिलता रहे सुकून पर
तुम सुकून दे ना पाओ किसी को ।
अपने दुःख साथ लिए जा रही ।
समुंदर थे मेरे तुम ....पर तुमने मुझ पर गरम रेत उड़ेल दी। मुझे खो दिया तुमने बिना पाए।
विदा दीजिए।
लड़की मुड़ी और अपना मन निकाल कर सामने पड़े पत्थर से खुद मार मार कर लहूलुहान कर दिया।
तुम्हारी यही सजा मुकर्रर होती है। लड़की ने चीख कर खुद से कहा
और फिर वो गूंगी हो गई।
अशांत लड़का शांत समुंदर को देखता रहा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें