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जब ईश्वर को छुपने के लिए कहीं जगह नहीं मिलती वो प्रेमी की च…

जब ईश्वर को छुपने के लिए कहीं जगह नहीं मिलती वो प्रेमी की चुप में छुप जाता है। अबोला बनकर उस अबोले से फिर चुनकर मैं तुम्हारे ख्वाब देखती हूं। इससे ज्यादा ईश्वर तुमको क्या दूंगी कैसे दूंगी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें