कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3389

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तिल ठोड़ी का तुम्हारा और गुड़ तो आप हैं ही

तिल ठोड़ी का तुम्हारा और गुड़ तो आप हैं ही... मेरे दिल को पता है... तू यहीं है यहां है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें