कल्पनाशब्दों के बीच
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किस पन्ने में कितनी खुशबू कहाँ, कितनी देर तक ,कैसे रखूं? मु…

किस पन्ने में कितनी खुशबू कहाँ, कितनी देर तक ,कैसे रखूं? मुझे छपना है। उसने किताब से पूछा..... किताब मुस्कुराकर बोली... कहीं भी रख दो मेरे "हमदम" तुम्हारे जैसा कोई कैक्टस नहीं .... कोई बोगेन्विलिया नहीं......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें