कल्पनाशब्दों के बीच
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पहाड़ी भोर.... आज दो दिन बाद बरखा रुकी है।

पहाड़ी भोर.... आज दो दिन बाद बरखा रुकी है। स्लेटी से असमानी रंग नीला हुआ.... हुबहू तुमसा मिला *तस्वीर अभी चाय पीते हुए ली है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें