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प्रेम अगर सूखता मरता नहीं तो कविता में भरता जाता है

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प्रेम अगर सूखता मरता नहीं तो कविता में भरता जाता है ये जो अधूरी अधूरी प्रेम कहानियां हैं ना .... ऐसी ही अतुकांत गद्य भरी कविताएं हैं। *तेरा ज़िक्र हो रहा है....😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें