कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3329

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प्रेम एक घना एकांत है।

प्रेम एक घना एकांत है। उतना भर सुंदर जितना कहा जा सके। सोचा जाने वाला हिस्सा उसका दुःख है *आज यहां गहरे बादल हैं।चुटकी भर धूप नसीब ना हुई। संग बाबुषा हैं। और मैं शीशे की लड़की हूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें