भाषा / Language
प्रेम एक घना एकांत है।
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प्रेम एक घना एकांत है।
उतना भर सुंदर जितना कहा जा सके।
सोचा जाने वाला हिस्सा उसका दुःख है
*आज यहां गहरे बादल हैं।चुटकी भर धूप नसीब ना हुई। संग बाबुषा हैं।
और मैं शीशे की लड़की हूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें