कल्पनाशब्दों के बीच
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उपहार

उपहार... जिस रोज़ मिलोगे क्या लाओगे मेरे लिए? विदा और तुम क्या दोगी? पुनर्मिलन *जब्त रखने की शिफा है तुम्हारे पास कल्पना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें