भाषा / Language
आज बगिया में कुछ नए मेहमान लाई हूँ। फूलों का मौसम लौटा है।
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आज बगिया में कुछ नए मेहमान लाई हूँ। फूलों का मौसम लौटा है।
बालकनी रंग और रंगत से भर गई है।
ढ़लती शाम में ये मेरा रूमानी कोना है।
तुम यहीं मिलते हो मुझे...
चाँद ,सूरज,तारे,शाम,हवा,बारिश और कभी बादल बनकर
अभी की तस्वीरें सांझा कर रही ।
तुम तक महक पहुंचे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें