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रात में से अपना दिन भींच देने की प्यास और दिन में से अपनी र…

रात में से अपना दिन भींच देने की प्यास और दिन में से अपनी रात सींच देने की आस ही मेरी कविता है। जिस रोज़ तुम को चुना था..... प्रेम पर रत्ती भर भरोसा नहीं था। बस खुद की जिद्द का अंदाज़ा था।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें