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रचना 3247

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हम सब अपने अपने दुःख से बने हुए बिजूका हैं

हम सब अपने अपने दुःख से बने हुए बिजूका हैं ज़िन्दगी पर खड़े हैं सुख को उड़ाते रहते हैं😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें