कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम्हारी...... "सुनो" का अंत नहीं था

तुम्हारी...... "सुनो" का अंत नहीं था ..... इसीलिए ......मेरा "कहो" भी अनंत हो चला मैं ......"सुनो" कहना ही भूल गयी तुमने भी ......"कहो" कहना बिसरा दिया *दुःख एक लंबी नदी है ...तुम उसके कटाव
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें