कल्पनाशब्दों के बीच
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जीवन बातों नातों में खर्च हो जाता है

जीवन बातों नातों में खर्च हो जाता है... उसे चुपके चुपके अपने लिए छिपा कर जरूर रखना चाहिए। मैं अक्सर अपनी चुप्पी में ख़ुद को सम्पूर्ण पाती हूँ। इस अक्सर को अक्सर ही रखना पसंद है। हवा में दो किरदार बहुत हैं जी भर गढ़ने के लिए....देखने के लिए...छूने के लिए इक तुम इक मैं तू नहीं तो ज़िन्दगी में और क्या रह जायेगा😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें