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रचना 3218

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जिस रोज़ रूबरू होंगे

जिस रोज़ रूबरू होंगे उस रोज़ सुर्ख़-रू होंगे *तुम मेरी रोशनी का बड़ा हिस्सा हो ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें