कल्पनाशब्दों के बीच
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आज मेरे पास इनसे सुंदर तस्वीर नहीं।

आज मेरे पास इनसे सुंदर तस्वीर नहीं। आज करीब दो साल बाद बच्चे स्कूल आये। एक उम्मीद खिली की जीवन का चक्का घूम रहा। बच्चे स्कूल आने लगे हैं तो लगता है जीवन गति पकड़ रहा । आज मेरे छोटे बच्चे पहले दिन स्कूल आए। हम सब बहुत खुश हैं। विद्यालय चहक उठा है। मैंने सारी व्यवस्था ऑनलाइन ही देखी। अभी अल्मोड़ा हूँ। जल्द इनसे मिलूंगी। अभी संख्या कम है ।10 -10 बच्चे ही आ रहे। 460 बच्चों में से 175 बच्चों ने स्कूल आने की मंशा जाहिर की है। आप सब अभिभावकों का आभार। अभी क्लासेज हाइब्रिड मोड में चलेंगी। मुझे विश्वास है जल्द मेरी बगिया के सभी फूल महकेंगे। विद्यालय बच्चों से भर जाएगा। ईश्वर का शुक्रिया कि ये शुभ दिन दिखाया। मन बहुत खुश है आज।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें