भाषा / Language
ज़िन्दगी का ज्यादातर हिस्सा रोटी, छत और दुनियादारी का है
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ज़िन्दगी का ज्यादातर हिस्सा रोटी, छत और दुनियादारी का है ......
लोग यूं ही कहते हैं दुनिया प्रेम से चलती है।
प्रेम से तो बस प्रेम ही घूमता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें