भाषा / Language
दो पढ़ाके
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दो पढ़ाके....
दक्षु के इम्तिहान चल रहे।
साँस मेरी तेज़ चलती हैं।
भव्या का तो पता ही नहीं चला ...कब पढ़ ली और फ़ुर्र उड़ गई। उसने कभी परेशान नहीं किया।
ये तो मन मौजी ।डर ही नहीं लगता इसको।
आता हो तो ठीक
न आता हो तो भी ठीक।
हो जाएगा ।chill माँ 😊😊😊
आधे घंटे पढ़ ले तो कहता है...
Break ले रहा हूँ।😢
क्या ही करेगा।
मुझे तो हँसी ही आ जाती इसकी बातों पर। टेंशन भी होती है पर
सोचती हूँ ....ये भी कुछ न कुछ कर ही लेगा। उम्र के साथ अक्ल फटाफट आती है।
खायेगा धचका तो पार लग ही जायेगा।
लड़के शायद होते ही हैं ऐसे....
बेफ़िक्र ....फंटूश
जो होगा देख लेंगे टाइप्स😊
सुबह जम कर खेल आया है 3 घंटे क्रिकेट कि शाम को भरोसा नहीं मैं जाने दूँगी या नहीं☺️☺️☺️☺️
*हद देखो .... मैग्गी भी बन गयी अपने लिए उसकी ब्रेक टाइम में जब तक मैं उसकी कारस्तानी लिख रही😊😊
क्या होगा इसका
😊
माँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें