कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3175

भाषा / Language

मेरे पास दिन भर की ढ़ेरों शिकायतें है पर रात होते होते वो म…

मेरे पास दिन भर की ढ़ेरों शिकायतें है पर रात होते होते वो मुस्कान में बदलती जाती हैं। मैं सुबह उठकर सबसे पहले ईश्वर और तुम्हें हँसते हुए पाती हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें