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बंद दरवाज़ों पर खुली खिड़की उकेरने का हुनर सिर्फ़ प्रेम की उंग…

बंद दरवाज़ों पर खुली खिड़की उकेरने का हुनर सिर्फ़ प्रेम की उंगलियों में होता है। *मन लबालब रहे ... बस तुमसे तस्वीर मेरी है पर मुझको तुम दिखते हो😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें