कल्पनाशब्दों के बीच
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होने और हो जाने के बीच का अंतराल प्रतीक्षा नहीं सब्र है।

होने और हो जाने के बीच का अंतराल प्रतीक्षा नहीं सब्र है। इस अंतराल को हँस कर छोटा और दुःख कर बेहिसाब किया जा सकता है। सब्र सूखे फूल से बना गुलकंद है। समझ से परे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें