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मन के पांचवे खाने में हम उन ख्वाइशों को जगह देते हैं जिन्हे…
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मन के पांचवे खाने में हम उन ख्वाइशों को जगह देते हैं जिन्हें हम wish list कहते हैं। जिसको करके देखने और होते देखने के लिए हमने जागती आँखों से स्वप्न बुना होता है। कुछ ऐसी बातें जो बस अपनी खुशी के लिए की जाती हों.…..
मेरी भी हैं....
उसमें से कल एक पूरी करके देखी....
खुद को नया लुक दिया ।बाल हाईलाइट करवा कर देखे। ये सब कभी नहीं किया।
खुद को pre bday gift😊
एक टैटू बनवाने का भी जिगरा है। जल्द करवा लूँ क्या पता😊😊
जिंदगी में वो वो जरूर कर लो जिसको करने के लिए पांचवा मन का खाना बना रखा है।
ज़िन्दगी कहाँ मिलती है दुबारा।😊
अगले साल half century जड़ने वाली हूँ।जाती उम्र के साथ wish list छोटी कर देने का मन रखती हूं।
भव्या और दक्षु को तो बहुत पसंद आये। विनोद अनमने से मुस्कुरा दिए... 😊😊
*पोस्ट इस लिए भी डाल रही कि क्या पता मुझे देख के कोई सखी या सखा अपनी wish list धूल से निकाल ले😊
तस्वीर में साथ मेरी दोस्त Golden Khan है...जो super talented है ।ये उसी का अंदाज़ है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें